- बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर को बनाया गया ठेकेदार
- फर्जी बिलों पर किए गए भुगतान सचिव और सरपंच द्वारा
भोपाल जिले के जनपद फंदा में इमलिया पंचायत मैं कई वर्षों से फर्जी बिलों पर भुगतान करने का भ्रष्टाचार सामने आया है ।
इमलिया पंचायत मैं जो फर्जी बिल मिले हैं वह सिसोदिया कंस्ट्रक्शन राजीव नगर गढ़पुरा बाबा रामदेव मंदिर भोपाल के पाए गए हैं जबकि सिसोदिया कंट्रक्शन का पीडब्ल्यूडी में इनका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है सिसोदिया कंट्रक्शन के जो बिल फर्जी बनाकर भुगतान किया गया है उन पर 14 नंबरों का टिन नंबर डाला गया है जिसे सिसोदिया कंट्रक्शन के पावती रसीद बिलो पर दर्शाया गया है।
फर्जी पावती बिल
जिसमें19,10,2019 को मानव दिवस सीसी रोड ₹60000 का फर्जी बिल दूसरा 27,4,2018 का वाउचर क्रमांक 8 पावती रसीद बिल जिसमें फूल सिंह आत्मा हजारीलाल नामक व्यक्ति को सेमरा सैयद में चल रहे सीसी रोड नाली निर्माण कार्य का मजदूरी बिल ₹45000 का भुगतान किया गया है तीसरा 7,07,2015 का एक बिल सीसी रोड नाली निर्माण कार्य मेन रोड पर किया गया जिसका मजदूरों का भुगतान सिसोदिया कंस्ट्रक्शन के द्वारा 47400 रुपए का भुगतान फर्जी बिल पर भुगतान किया गया है ।
सिसोदिया कंट्रक्शन का 14 नंबर का फर्जी टिन नंबर
आइए आपको बताते हैं सिसोदिया कंट्रक्शन के बिलों के ऊपर 14 नंबरों का जो टिन नंबर डाला गया है वह सरासर गलत है जब की टिन नंबर 15 अंको का होना चाहिए और इन्हीं बिलों के ऊपर पीडब्ल्यूडी का रजिस्ट्रेशन नंबर भी होना चाहिए यह सारे के सारे बिल पंचायत के सरपंच सचिवों और सिसोदिया कंट्रक्शन जोकि बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर हैं इनकी मिलीभगत से फर्जी बिलों पर भुगतान किया गया है जबकि नियम में पंचायतों में किसी भी योजना का कार्य करने के लिए पंचायत के मनरेगा मजदूर द्वारा कार्य किया जाना चाहिए अगर किसी भी नियम के अंतर्गत ठेकेदारों के द्वारा भी कार्य कराया गया है तो वह ठेकेदार पीडब्ल्यूडी में रजिस्टर्ड होना आवश्यक है ।
पंचायत में किसी प्रकार की योजनाओं पर किया गया कार्य मैं ठेकेदार द्वारा जो कार्य किए गए उनके पक्के बिल होने चाहिए जिस पर 15 अंकों का टिन नंबर एवं पीडब्ल्यूडी का रजिस्ट्रेशन नंबर होना अनिवार्य होता है जबकि देखा गया है पंचायत के सरपंच और सचिव के द्वारा मनमानी करते हुए अपने निजी स्वार्थ के चलते बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर ओं को ठेकेदार कभी मजदूरों का ठेकेदार कभी सप्लायर बनाकर जिन बिलों पर भुगतान किया गया उनमें कहीं भी
15 अंको का टिन नंबर अथवा पीडब्ल्यूडी का रजिस्ट्रेशन नहीं दर्शाया गया है ।
यह सभी बिल कच्चे और रसीदी पावती बिल सरपंच और सचिव की मिलीभगत से सिसोदिया कंस्ट्रक्शन जोकि मात्र एक सप्लायर है इसकी पुष्टि के लिए इनके बिलों से ही की जा रही है ।
इमलिया पंचायत सोलर लाइट भी बंद पड़ी
इतना ही नहीं इस पंचायत में जितने भी सोलर लाइट हैं वह सारी की सारी बंद पड़ी हुई हैं जिनके कार्य निर्माण के भुगतान किए जा चुके हैं वही पंचायत में कितने शौचालय बनाए गए इसकी भी कोई सही जानकारी नहीं बताई गई जबकि पंचायत भवन के कार्यालय का जो शौचालय है वह भी कंप्लीट नहीं है वह गंदी दुर्दशा में देखा जा सकता है अब सवाल यह खड़ा होता है कि जब ग्राम पंचायत के कार्यालयों में शौचालय कि इतनी बुरी हालत है तो अंदाज लगाया जा सकता है के पंचायतों में बनाए गए शौचालयों की क्या हालत होगी बने भी हैं कि नहीं यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है ।
इमलिया पंचायत के पंचायत भवन में शौचालय की दुर्दशा
इतने बड़े पैमाने पर लाखों रुपए के फर्जी बिलों पर किया गया भुगतान सरपंच और सचिव की मिलीभगत के साथ साथ जनपद सीईओ फंदा भी सवालों के घेरे में है क्या इनकी जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह इन बिलों की अच्छी तरह से जांच पड़ताल व इनकी पुष्टि कर ले फिर इन पर भुगतान किया जाए लेकिन जब सरपंच सचिव के अलावा जनपद सीईओ का व्यक्तिगत स्वार्थ का सवाल हो तो ऐसे बिल अक्सर जनपद फंदा में जांच के दौरान करोड़ों रुपए के फर्जी बिल सामने आ सकते हैं अब सवाल यह खड़ा होता है कि यहां जांच कौन करें एक तरफ पंचायत मंत्री ग्रामीण किसानों को लेकर पंचायतों में बड़ी-बड़ी घोषणाओं के झूठे वादे करते हैं वही पंचायतों में इस तरह के हो रहे भ्रष्टाचार की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत मंत्री जिला कलेक्टर को इन भ्रष्ट सरपंच सचिव के द्वारा किए जा रहे फर्जी बिलों के भुगतान और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच करके इनके ऊपर कठोर कार्यवाही करते हुए न्यायालय तक पहुंचाया जाना चाहिए ।
इमलिया पंचायत मैं सरपंच सचिव के द्वारा किया गया भ्रष्टाचार फर्जी और कच्चे बिलों का भुगतान का भ्रष्टाचार यहीं नहीं खत्म होता अगले एपिसोड में और भी कई योजनाओं मैं किए गए भ्रष्टाचार के सबूत इकट्ठे करने के बाद जनता और शासन प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा ।






