होशंगाबाद - जब से कोरोना काल प्रारंभ हुआ है तभी से शिक्षा के उन मंदिरों जिद को पब्लिक स्कूल कहा जाता है उनके प्रबंधन और पालक संघों के बीच तलवार खिंची हुई है. एक तरफ अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए पालक संघ है वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधन है जो हार नहीं मानने के लिए कमर कस कर बैठा है वहीं शासन की कार्यप्रणाली को देखते हुए नीति और अनीति के इस युद्ध में महसूस होता है कि शासन आ परोक्ष रूप से स्कूल प्रबंधन के साथ ही खड़ा है वही न्यायालय के पालक संघों के हित में दिए हुए निर्णयो मैं स्कूल प्रबंधन थोड़ी सी भी संधि में अपने बचाव का रास्ता निकालते हुए डट कर अपनी मनमर्जी करने पर उतारू हैं और उनका साथ दे रहा है मध्यप्रदेश शासन।
अब पाठक गण सोच रहे होंगे यह संधि क्या है और उसमें न्यायालय के आदेशों को धता बताते हुए बीच का रास्ता कैसे निकाला गया तो उसके बारे में इस संवाददाता को विस्तार से जानकारी देते हुए नगर के समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता सीता शरण पांडे ने बतलाया कि माननीय उच्च न्यायालय ने पालक संघों की ओर से दायर फीस संबंधी मामले में अपना निर्णय सुनाते हुए आदेशित किया है कि कोरोना काल में स्कूल संचालित ना होने की दशा में स्कूल प्रबंधन सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं माननीय न्यायालय के इस आदेश के परिपेक्ष में स्कूल प्रबंधन ने जो पुराना फीस शेड्यूल था जिसमें खेलकूद की फीस कंप्यूटर शिक्षण की फीस या अन्य गतिविधियों की फीस जो अलग से ली जाती थी उन सब को मिलाकर अब एक ही नाम दे दिया है ट्यूशन फीस और पूरी फीस वसूल की जा रही है जो अनुचित है इस संबंध में जब होशंगाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी को स्थानीय शांति निकेतन स्कूल के प्रबंधन द्वारा माननीय न्यायालय के इस निर्णय की अवज्ञा करने बाबत आवेदन सौंपा गया तो उन्होंने इस प्रकरण में किसी प्रकार की जांच नहीं की ना ही आवेदकों से कोई पूछताछ की साथ ही उन्होंने की गई शिकायत की प्रति स्कूल प्रबंधन को उपलब्ध तो करवा ही दी और मामले को भी नस्ती वध कर दिया जिसके दुष्परिणाम यह हुए की स्कूल प्रबंधन ने उन पालको के साथ ही स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भी शक्ति बढ़ा दी।
सीता शरण पांडे का स्कूल शिक्षा विभाग के ऊपर सीधा आरोप है कि पीड़ितों के आवेदन की स्कूटनी ना किया जाना. आवेदन की प्रति बगैर कार्रवाई किए स्कूल प्रबंधन को उपलब्ध करवाना और मामले में आवेदकों को बगैर सुने उसे नस्ती वध किया जाना वह भी उस अवस्था में जब मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है एक प्रकार से माननीय न्यायालय की अवमानना है।
उनका कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी होशंगाबाद ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका अनावश्यक रूप से निष्प्रभावी करने के षड्यंत्र में अपनी भूमिका का निर्वहन किया है उनके द्वारा पालको के विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत आवेदन पत्रों कोसा विधि निराकृत करने के बजाए शांतिनिकेतन स्कूल के प्राचार्य का आपराधिक संरक्षण करते हुए अपराध का संरक्षण एवं अपराधियों का समर्थन किया गया है जो भारतीय दंड संहिता की धारा 166 एवं 167 का गंभीर उल्लंघन है और किए गए इस अपराध के विरुद्ध उन्होंने माननीय रजिस्ट्रार हाई कोर्ट के साथ ही आयुक्त नर्मदा पुरम संभाग जिलाधीश होशंगाबाद एवं संयुक्त संचालक लोक शिक्षण नर्मदा पुरम संभाग को आवेदन प्रस्तुत कर जिला शिक्षा अधिकारी होशंगाबाद द्वारा कारिक किए गए अपराध के लिए उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने बाबत अनुमति प्रदान करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया है।
शिव मोहन सिंह पंच सरपंच समाचार भोपाल मध्य प्रदेश

